!! आज मुझे सो लेने दो::निर्भया !!

बहुत सालों से जगी हैं ये आँखें, यूँ तो आँसू अब बाकी नहीं इसमें, खुली आँखों की एक आस ने मुझे सालों से सोने ना दिया, आज मुझे सो लेने दो ॥


उस रात की ठंड से तो मै बच निकली, उन दरिंदों की भूख ने मुझे चीर दिया, अदालतों की सुनवायी ने जख्मों को सूखने ना दिया,देर से ही सही,न्याय का मरहम लगा, अब मुझे सो लेने दो ॥

माँ के पैरों के झालों ने, उसके चेहरे की झुर्रियों ने , उसकी मन की दृढ़ता ने, मेरी इस दुनिया की बेबसी ने, रूला कर आँखों में भर-भर घाव किया, अब मुझे सो लेने दो ॥

सात बरस से मेरे घर में ना होली हुयी ना दिवाली, मेरे दॄार पर खुशियों ने ना रुख किया, सालों पुराने मातम को आज जश्न में तब्दील होने दो, इस सुबह के आगोश में मेरे अस्तिव को विलीन होने दो, बस अब मुझे सोने दो ॥

विदा तो मैं हो गयी थी , जिस रोज देह का त्याग किया, रूह को मेरी, दलीलों, तारिखों ने जंजीरों में कैद किया, वक्त हुआ अब अलविदा कह लेने दो, सुकून से अब मुझे भी सो लेने दो ॥

उम्मीद यहीं करती हूँ, और ना निर्भया होने पाए, ठिठुरती रातों में, किसी खाली बस में , इंसान से पहले कहीं इंसानियत ना मरने पाए, हर इक मॉं की लाडली सुरक्षित घर को वापस आए ॥

इस इंसाफ की ज्योत को बुझने मत देना दोस्तों, गर करे कोई वकील प्रश्न चरित्र पर तो बक्शना भी मत दोस्तों,

मॉं तुम भी आराम करना, संघर्ष तुम्हारा जीत गया, देखो छट गये अब काले बादल, एक नया आरंभ होने को है,उससे पहले जी भर मुझे भी सो लेने दो ॥


॥॰॥बस आज मुझे सो लेने दो॥॰॥
॥॰॥बस आज मुझे सो लेने दो॥॰॥

“Date:: 20th March 2020 Justice Day”

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4 thoughts on “!! आज मुझे सो लेने दो::निर्भया !!”

  1. Avatar

    Very well penned it. Although pain and loss Nirbhaya was unbearable and hats off to her mother. Your words are so heart touching, every mom have below unhidden worry
    इंसानियत ना मरने पाए, हर इक मॉं की लाडली सुरक्षित घर को वापस आए ॥

  2. Avatar

    Very heart touching poem .. you are so talented Archana . Love to read your stories and poem.keep writing 👍🏻

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