!! आज मुझे सो लेने दो::निर्भया !!

बहुत सालों से जगी हैं ये आँखें, यूँ तो आँसू अब बाकी नहीं इसमें, खुली आँखों की एक आस ने मुझे सालों से सोने ना दिया, आज मुझे सो लेने दो ॥ उस रात की ठंड से तो मै बच निकली, उन दरिंदों की भूख ने मुझे चीर दिया, अदालतों की सुनवायी ने जख्मों को …

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